नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने Central Board of Film Certification (CBFC) का पुनर्गठन कर दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड की घोषणा की। नई टीम में फिल्म और मनोरंजन जगत के कई चर्चित नाम शामिल हैं, जिनमें प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी, मनोज जोशी और प्रोसेनजीत चटर्जी प्रमुख हैं।
नए बोर्ड का गठन तत्काल प्रभाव से तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, के लिए किया गया है। नए बोर्ड में फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ संगीत, साहित्य, थिएटर और अन्य creative fields से जुड़े लोगों को भी जगह दी गई है।
CBFC के नए 18 सदस्यों में कौन-कौन शामिल?
नए बोर्ड में शामिल सदस्यों की पूरी सूची इस प्रकार है:
- विनोद अनुपम
- मनोज जोशी
- अभिषेक जैन
- रिकी केज
- प्रियदर्शन
- सुनील शेट्टी
- हंसराज हंस
- सुप्रिया यारलागड्डा
- यतींद्र मिश्र
- रूपाली गांगुली
- प्रीति जिंटा
- नीला माधब पांडा
- पंकज त्रिपाठी
- प्रोसेनजीत चटर्जी
- पल्लवी जोशी
- निशिगंधा वाड
- वामन केंद्रे
- रमेश पतंगे
शशि शेखर वेम्पति हैं CBFC के चेयरपर्सन
CBFC की कमान शशि शेखर वेम्पति के हाथों में है। वह मई 2026 से बोर्ड के चेयरपर्सन हैं।
नए बोर्ड में सिनेमा के साथ-साथ टेलीविजन, संगीत, साहित्य और थिएटर से जुड़े कई लोगों को शामिल किया गया है। ग्रैमी अवॉर्ड विजेता संगीतकार रिकी केज, फिल्ममेकर प्रियदर्शन, लेखक यतींद्र मिश्र, निर्देशक नीला माधब पांडा और थिएटर से जुड़े वामन केंद्रे भी इस पैनल का हिस्सा हैं।
करीब नौ साल बाद हुआ CBFC का बड़ा पुनर्गठन
CBFC के नए बोर्ड का गठन लंबे अंतराल के बाद हुआ है। पिछली बार बोर्ड का औपचारिक पुनर्गठन अगस्त 2017 में किया गया था।
इस लिहाज से सितंबर 2026 में हुआ यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले सितंबर में CBFC की एक अहम बैठक भी हुई थी, जिसमें फिल्म certification और Revising Committees के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
CBFC का काम क्या है?
CBFC सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली statutory body है। इसका मुख्य काम भारत में public exhibition के लिए फिल्मों को certify करना है।
किसी फिल्म को सिनेमाघरों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने से पहले CBFC certification जरूरी होता है।
मौजूदा certification system में फिल्मों को अलग-अलग categories में certificate दिया जाता है:
- U – Unrestricted Public Exhibition
- UA 7+ – 7 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए parental guidance
- UA 13+ – 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए parental guidance
- UA 16+ – 16 साल से कम उम्र के दर्शकों के लिए parental guidance
- A – Adults Only
- S – किसी विशेष profession या class of persons के लिए restricted exhibition
CBFC सिर्फ फिल्मों को 'कट' करने वाला बोर्ड नहीं
CBFC को आम बोलचाल में अक्सर “सेंसर बोर्ड” कहा जाता है, लेकिन इसका आधिकारिक नाम Central Board of Film Certification है।
इसका काम सिर्फ फिल्मों में scenes या dialogues हटाना नहीं है, बल्कि फिल्मों को certification देना और यह तय करना भी है कि किसी फिल्म को किस category में सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति दी जाए।
Certification प्रक्रिया में देश की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी देशों के साथ संबंध, public order, decency और morality जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
2024 में बदले थे फिल्म certification के नियम
CBFC का काम अब Cinematograph (Certification) Rules, 2024 के तहत होता है। इन नियमों ने 1983 के पुराने certification rules की जगह ली थी।
नए नियमों के तहत certification process को ज्यादा digital और streamlined बनाने पर जोर दिया गया। इसमें priority screening, age-based UA markers और accessibility standards जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
UA certification के तहत अब UA 7+, UA 13+ और UA 16+ age markers का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दर्शकों और माता-पिता को फिल्म की suitability को समझने में मदद मिलती है।
नए बोर्ड में फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम
नए CBFC board में फिल्म और मनोरंजन जगत के कई चर्चित चेहरे शामिल किए गए हैं।
प्रीति जिंटा और पंकज त्रिपाठी जैसे लोकप्रिय कलाकारों के साथ सुनील शेट्टी, मनोज जोशी, पल्लवी जोशी, रूपाली गांगुली और प्रोसेनजीत चटर्जी को भी बोर्ड में जगह मिली है।
इसके अलावा फिल्ममेकर प्रियदर्शन, संगीतकार रिकी केज, निर्देशक नीला माधब पांडा और निर्माता सुप्रिया यारलागड्डा भी नए बोर्ड का हिस्सा हैं।
पांच महिलाएं भी नए बोर्ड का हिस्सा
18 सदस्यीय नए बोर्ड में पांच महिला सदस्य शामिल हैं।
इनमें रूपाली गांगुली, प्रीति जिंटा, सुप्रिया यारलागड्डा, पल्लवी जोशी और निशिगंधा वाड शामिल हैं।
Cinematograph (Certification) Rules, 2024 में CBFC Board और Advisory Panels में महिलाओं के बेहतर representation पर भी जोर दिया गया है।
OTT Censorship की बहस के बीच CBFC में बदलाव
CBFC का यह पुनर्गठन ऐसे समय में हुआ है जब भारत में OTT content regulation और censorship को लेकर भी बहस तेज है।
हाल ही में OTT content को लेकर RSS की ओर से एक panel बनाए जाने की खबर सामने आई है। इसमें streaming platforms पर अश्लील, आपत्तिजनक या बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले content को लेकर ज्यादा regulation की मांग की चर्चा है।
हालांकि, फिलहाल OTT platforms फिल्मों की तरह CBFC certification के दायरे में नहीं आते। इसलिए नए CBFC board का गठन अपने आप में OTT content पर सेंसरशिप लागू होने का संकेत नहीं है।
नए बोर्ड से क्या उम्मीदें हैं?
नए CBFC board के सामने आने वाले समय में कई अहम चुनौतियां होंगी।
एक तरफ filmmakers लगातार creative freedom और freedom of expression की बात करते रहे हैं। दूसरी तरफ फिल्मों में हिंसा, अश्लीलता, धार्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक प्रभाव जैसे मुद्दे भी certification प्रक्रिया का हिस्सा बने हुए हैं।
इसके अलावा cinema और OTT के बीच बदलती regulatory boundaries भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती हैं।
ऐसे में नए बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती certification, social responsibility और creative freedom के बीच संतुलन बनाने की होगी।
नए CBFC Board की अहम बातें
CBFC का नया बोर्ड: 18 सदस्य
बोर्ड का गठन: 16 सितंबर 2026
कार्यकाल: 3 साल या अगले आदेश तक
चेयरपर्सन: शशि शेखर वेम्पति
प्रमुख नए सदस्य: प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी, मनोज जोशी और प्रोसेनजीत चटर्जी
कानूनी आधार: Cinematograph Act, 1952
नए Certification Rules: Cinematograph (Certification) Rules, 2024
Certification Categories: U, UA 7+, UA 13+, UA 16+, A और S
Bottom Line
सरकार का CBFC का पुनर्गठन सिर्फ नए चेहरों की नियुक्ति नहीं है। लंबे अंतराल के बाद बनी यह नई टीम ऐसे समय में काम करेगी जब भारतीय फिल्म इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और cinema के साथ OTT और digital entertainment भी content consumption का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं।
अब देखना होगा कि प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी समेत 18 सदस्यीय यह नया बोर्ड आने वाले वर्षों में film certification को किस दिशा में ले जाता है और creative freedom तथा regulation के बीच किस तरह का संतुलन बनाता है।