दीया मिर्जा की पर्यावरण वाली नसीहतों पर सवाल: नारियल पानी वाले से लेकर दिवाली तक विवाद, ईद और बकरीद पर चुप्पी को लेकर भी घिरीं
दीया मिर्जा का बीएमसी के दिवाली वीडियो को लेकर विवाद बढ़ गया है। इससे पहले बेटे और नारियल पानी वाले का किस्सा सुनाने पर भी वह आलोचना के घेरे में आई थीं। ईद और बकरीद पर पर्यावरण संबंधी अपीलों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
बेटे से डिलीवरी वर्कर को प्लास्टिक वापस ले जाने की बात कहलाने का किस्सा सुनाया तो विशेषाधिकार पर उठे सवाल, अब बीएमसी के दिवाली वीडियो से मचा बवाल। नर्मदा बांध, होली और जलवायु परिवर्तन पर उनके पुराने बयान भी रहे हैं चर्चा में।
बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा एक बार फिर अपने पर्यावरण संबंधी संदेश और सार्वजनिक बयानों को लेकर विवादों में हैं। इस बार मामला दिवाली पर पटाखे न जलाने और प्रदूषण से बचने की अपील का है। बीएमसी ने अपने जागरूकता अभियान में दीया का वीडियो जारी किया था, लेकिन मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद इसे सोशल मीडिया से हटा दिया गया। इसके बाद महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी सवाल उठाया कि दीया दिवाली और होली पर पर्यावरण की चिंता जताती हैं, लेकिन ईद, मुहर्रम और बकरीद जैसे मौकों पर ऐसी अपील क्यों नहीं करतीं?
यह पहला मौका नहीं है जब दीया की पर्यावरण संबंधी नसीहतों पर सवाल उठे हों। कुछ महीने पहले उन्होंने एक पॉडकास्ट में अपने पांच साल के बेटे अव्यान और नारियल पानी पहुंचाने वाले एक डिलीवरी वर्कर का किस्सा सुनाया था। दीया ने इसे बच्चे की पर्यावरण के प्रति जागरूकता के उदाहरण के तौर पर पेश किया, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे आम कामगार के प्रति असंवेदनशीलता और विशेषाधिकार की मानसिकता से जोड़कर देखा। अब बीएमसी विवाद के बाद उनके पुराने बयान फिर चर्चा में हैं।
नारियल पानी वाले को बेटे ने लौटाने को कहा प्लास्टिक, दीया ने गर्व से सुनाया था किस्सा
जून 2026 में सोहा अली खान के पॉडकास्ट में दीया मिर्जा ने बताया था कि उन्हें नारियल पानी प्लास्टिक की थैली और प्लास्टिक स्ट्रॉ में मिलना बिल्कुल पसंद नहीं है। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक दिन नारियल पानी पहुंचाने वाला व्यक्ति प्लास्टिक की थैली में नारियल पानी लेकर आया। उस समय उनके पांच साल के बेटे अव्यान ने दरवाजा खोला और डिलीवरी वर्कर से कहा कि उनके घर में प्लास्टिक की अनुमति नहीं है, इसलिए वह नारियल पानी बाहर रखकर प्लास्टिक और स्ट्रॉ वापस ले जाए।
दीया ने इस किस्से को बच्चे की पर्यावरण के प्रति समझ और आत्मविश्वास के तौर पर सुनाया। पॉडकास्ट में मौजूद सोहा अली खान ने भी बच्चे के इस व्यवहार की तारीफ की।
लेकिन इंटरनेट पर इस कहानी का दूसरा पहलू चर्चा में आ गया। लोगों ने सवाल किया कि एक डिलीवरी वर्कर अपना काम करने आया था, प्लास्टिक की पैकिंग की जिम्मेदारी उसके सिर डालने के बजाय परिवार खुद भी कोई विकल्प अपना सकता था। अगर प्लास्टिक से इतनी ही परेशानी थी तो नारियल पानी पहले से अपने बर्तन में मंगवाया जा सकता था या खुद जाकर लिया जा सकता था।
लोगों की आपत्ति पर्यावरण संरक्षण के विचार से नहीं, बल्कि उस तरीके से थी जिसमें एक छोटे बच्चे के जरिए रोजी कमाने वाले कामगार को प्लास्टिक वापस ले जाने का निर्देश देने वाली घटना को गर्व के साथ सुनाया गया। आलोचकों ने इसे पर्यावरण जागरूकता से ज्यादा विशेषाधिकार का प्रदर्शन बताया।
सफाई दी, कहा बेटे ने डिलीवरी वर्कर का अपमान नहीं किया
विवाद बढ़ने के बाद दीया ने अगस्त 2026 में एक इंटरव्यू में इस घटना पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि लोगों ने कहानी को गलत संदर्भ में लिया और उनके बेटे का मकसद डिलीवरी वर्कर का अपमान करना नहीं था। उनके मुताबिक, बच्चा सिर्फ यह बता रहा था कि उनके घर में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होता और वह ऐसी पैकिंग को बढ़ावा नहीं देना चाहता।
दीया ने यह भी कहा कि घटना गर्मियों की तेज धूप में नहीं हुई थी और उनके परिचित जानते हैं कि वह लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। हालांकि, उनकी सफाई के बाद भी बहस खत्म नहीं हुई। सवाल यही रहा कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए उस कामगार की स्थिति और सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी नहीं था?
दिवाली पर वीडियो हटने के बाद ईद और बकरीद का मुद्दा उठा
बीएमसी ने दिवाली के दौरान प्रदूषण कम करने के लिए कई सेलिब्रिटीज के वीडियो जारी किए थे। इनमें दीया मिर्जा के अलावा माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे भी शामिल थे। दीया ने लोगों से पटाखों के शोर और धुएं से बचने की अपील की थी।
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने उनके अभियान में शामिल होने पर आपत्ति जताई और कहा कि लोगों को दीया से दिवाली मनाने का तरीका सीखने की जरूरत नहीं है। इसके बाद बीएमसी ने उनका वीडियो हटा दिया। दीया ने जवाब में कहा कि यह वीडियो उन्होंने बीएमसी और बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जनहित में रिकॉर्ड किया था। वायु प्रदूषण स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है और इसे कम करने की कोशिशों का स्वागत होना चाहिए।
इसके बाद महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने सवाल उठाया कि दीया दिवाली और होली के दौरान पर्यावरण की अपील करती हैं, लेकिन ईद, मुहर्रम और बकरीद के दौरान ऐसी अपील क्यों नहीं करतीं? उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल रमजान और बकरीद मनाने की बात भी होनी चाहिए।
यहां एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। दीया ने ईद पर शुभकामनाएं दी हैं। 2021 में उन्होंने ईद के मौके पर सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा कर लोगों को ईद मुबारक कहा था। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वह ईद पर कभी कुछ नहीं बोलतीं। हालांकि, ईद और बकरीद के दौरान पर्यावरण संबंधी ऐसी ही सार्वजनिक अपीलों को लेकर उठे सवाल पर बहस जरूर हो सकती है। पर्यावरण संरक्षण की बात किसी एक धर्म या त्योहार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
होली पर पानी बचाने की अपील के बाद भी हुआ था विवाद
दीया मिर्जा इससे पहले 2016 में होली के दौरान भी विवादों में आई थीं। महाराष्ट्र के कई इलाकों में सूखे और पानी की कमी के बीच उन्होंने ट्वीट कर सवाल उठाया था कि जब किसान सूखे से जूझ रहे हैं, तब लोग होली खेलने के लिए पानी क्यों बर्बाद कर रहे हैं?
उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। कुछ लोगों ने इसे हिंदू त्योहार पर टिप्पणी माना। विवाद बढ़ने के बाद दीया ने सफाई दी थी कि उनका मकसद किसी धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा था कि वह सभी धर्मों और त्योहारों का सम्मान करती हैं, लेकिन पानी की कमी के समय उसका संरक्षण भी जरूरी है।
नर्मदा बांध परियोजना पर आमिर खान का समर्थन कर चुकी हैं
दीया मिर्जा के सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने का सिलसिला पुराना है। 2006 में सरदार सरोवर बांध परियोजना को लेकर अभिनेता आमिर खान के रुख का समर्थन करने के बाद भी वह विवादों में आई थीं। उन्होंने बांध के कारण विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास का सवाल उठाया था। उस समय गुजरात में उनके बयान का विरोध हुआ था।
दीया का तर्क था कि विकास परियोजनाओं के लाभ के साथ उन लोगों के अधिकारों और पुनर्वास की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, जिन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। इस मामले में भी उनके बयान को लेकर राजनीतिक बहस हुई थी।
जलवायु परिवर्तन को पितृसत्ता से जोड़ने पर भी हुई थी आलोचना
जून 2026 में सोहा अली खान के पॉडकास्ट में ही दीया ने जलवायु परिवर्तन के लिए पितृसत्तात्मक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराने वाली टिप्पणी की थी। उनके मुताबिक, लंबे समय से सत्ता और संसाधनों पर पुरुषों का वर्चस्व रहा है और प्रकृति का दोहन करने वाली व्यवस्थाएं इसी सोच से जुड़ी हैं।
इस बयान पर भी सोशल मीडिया पर बहस हुई। आलोचकों ने इसे जरूरत से ज्यादा सामान्यीकरण बताया। बाद में दीया ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा हर पुरुष की ओर नहीं, बल्कि उन सत्ता संरचनाओं की ओर था जो प्रकृति और संसाधनों के शोषण को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने अपने बयान का बचाव भी किया।
पर्यावरण की चिंता जरूरी, लेकिन नसीहत का तरीका भी मायने रखता है
दीया मिर्जा लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों का हिस्सा रही हैं। वह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सद्भावना दूत भी हैं और प्लास्टिक प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा स्वच्छ हवा जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रही हैं। इन मुद्दों पर उनकी सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
लेकिन सार्वजनिक जीवन में किसी भी प्रभावशाली चेहरे से सवाल पूछे जा सकते हैं। नारियल पानी वाले का किस्सा हो या दिवाली का वीडियो, बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि पर्यावरण बचाने की जरूरत है या नहीं। सवाल यह भी है कि संदेश किस तरह दिया जा रहा है, उसमें आम आदमी की मुश्किलों और दूसरे त्योहारों के प्रति समान दृष्टिकोण कितना दिखाई देता है।
दिवाली पर प्रदूषण की चिंता जायज है, तो ईद, बकरीद, मुहर्रम और दूसरे सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी पर्यावरण और स्वच्छता पर बात होनी चाहिए। इसी तरह प्लास्टिक का विरोध करना जरूरी है, लेकिन उस प्लास्टिक को लेकर काम करने वाले छोटे विक्रेता और डिलीवरी वर्कर की परिस्थिति समझना भी उतना ही जरूरी है।
दीया मिर्जा की मुश्किल यही है कि पर्यावरण संरक्षण का उनका संदेश कई बार उस अंदाज और संदर्भ के कारण बहस में घिर जाता है, जिसमें वह सामने आता है। अब सवाल उनके इरादे से आगे बढ़कर उनके संदेश की निरंतरता, संवेदनशीलता और समानता का है।
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Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
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