करवा चौथ से दिवाली तक, हर बार हिंदू त्योहारों पर ही क्यों छिड़ती है दीया मिर्जा की पर्यावरण और बराबरी वाली बहस?
करवा चौथ पर ‘वर्किंग वाइफ’ वाली पोस्ट से लेकर दिवाली पर पटाखों के खिलाफ BMC वीडियो तक, दीया मिर्जा के बयानों पर बार बार क्यों उठ रहे हैं सवाल? जानिए पूरा विवाद।
कभी करवा चौथ पर ‘वर्किंग वाइफ’ का संदेश, कभी होली पर पानी बचाने की अपील और अब दिवाली पर पटाखों के खिलाफ वीडियो। दीया मिर्जा के बयानों और पोस्ट पर बार बार उठ रहे सवालों ने नई बहस छेड़ दी है। क्या उनकी बातों का मकसद सिर्फ सामाजिक जागरूकता है या संदेश देने का तरीका भी सवालों के घेरे में है?
बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार वजह सिर्फ दिवाली पर पटाखे न जलाने की उनकी अपील नहीं है। सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी पोस्ट और त्योहारों को लेकर दिए गए बयानों को भी दोबारा खंगाला जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि पर्यावरण, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक बराबरी जैसे मुद्दों पर मुखर रहने वाली दीया की आवाज त्योहारों के संदर्भ में बार बार इसी तरह विवादों में क्यों घिर जाती है? क्या उनके संदेशों की भाषा और समय को लेकर सवाल जायज हैं, या फिर हर बार उनकी बात को धार्मिक चश्मे से देखा जा रहा है?
करवा चौथ पर पोस्ट, ‘वर्किंग वाइफ’ से बढ़ती है पति की उम्र!
इस विवाद की एक अहम कड़ी 29 अक्टूबर 2026 की उनकी इंस्टाग्राम पोस्ट है। करवा चौथ के मौके पर दीया ने लिखा, “A working wife extends a husband's life”, यानी एक कामकाजी पत्नी पति की उम्र बढ़ाती है।
पहली नजर में यह कामकाजी महिलाओं के योगदान और उनकी अहमियत को रेखांकित करने वाला संदेश लग सकता है। लेकिन पोस्ट के समय और उसकी शब्दावली ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि क्या पति की लंबी उम्र की कामना करने वाली परंपरा के दिन कामकाजी पत्नी को इस तरह सामने रखना जरूरी था? क्या इससे यह संदेश नहीं निकलता कि नौकरी करने वाली पत्नी का योगदान ज्यादा है और घर संभालने वाली महिला का कम?
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि करवा चौथ मनाना अपने आप में पितृसत्ता का समर्थन नहीं है। कई पढ़ी लिखी और आत्मनिर्भर महिलाएं भी अपनी इच्छा से यह परंपरा निभाती हैं। एक यूजर ने सवाल उठाया कि महिला सशक्तीकरण का संदेश देने के लिए गृहिणियों के योगदान को छोटा दिखाने की जरूरत क्यों है।
यहां सवाल दीया के कामकाजी महिलाओं के समर्थन पर नहीं, बल्कि उस संदेश की भाषा और संदर्भ पर है। अगर मकसद महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना था, तो क्या ऐसा संदेश नहीं दिया जा सकता था जिसमें कामकाजी महिलाओं के साथ घर संभालने वाली महिलाओं के योगदान को भी बराबर सम्मान मिलता? और क्या करवा चौथ के दिन इस पोस्ट से पैदा होने वाली प्रतिक्रिया का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था?
होली पर पानी बचाने की अपील, फिर लगा हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने का आरोप
दीया मिर्जा का त्योहारों और पर्यावरण को लेकर विवाद नया नहीं है। साल 2016 में महाराष्ट्र में सूखे और पानी की कमी के बीच उन्होंने होली पर पानी बर्बाद न करने की अपील की थी। उनकी पोस्ट में किसानों की आत्महत्या और पानी की बर्बादी का जिक्र था। उन्होंने लिखा था कि सूखे से जूझ रहे किसानों के बीच पानी से होली खेलना विडंबना है।
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें हिंदू विरोधी तक कह दिया। विवाद बढ़ने के बाद दीया ने सफाई दी थी कि उनका इरादा किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा था कि उन्हें सभी धर्मों, त्योहारों और परंपराओं का सम्मान है और उनकी अपील सिर्फ पानी बचाने के लिए थी।
यहां भी दो बातें एक साथ मौजूद हैं। महाराष्ट्र में पानी का संकट वास्तविक मुद्दा था और पानी बचाने की अपील अपने आप में गलत नहीं थी। लेकिन सवाल यह भी उठा कि क्या पर्यावरण संरक्षण का संदेश सभी त्योहारों और समुदायों के संदर्भ में समान रूप से दिया जाता है?
दिवाली पर BMC का वीडियो, और कुछ घंटों में बदल गया पूरा मामला
ताजा विवाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC के प्रदूषण जागरूकता अभियान से शुरू हुआ। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद BMC ने दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई हस्तियों से अपील कराई थी। इस अभियान में दीया मिर्जा के अलावा माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे भी शामिल थे।
दीया ने अपने वीडियो में लोगों से पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर सावधानी बरतने और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए दिवाली मनाने की अपील की। लेकिन मुंबई BJP अध्यक्ष अमित साटम ने उनके अभियान में शामिल होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दीया मिर्जा से दिवाली मनाने का तरीका सीखने की जरूरत नहीं है, हमारी परंपराएं हमारी संस्कृति में गहराई से जुड़ी हैं।
इसके बाद BMC ने दीया का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया। दिलचस्प बात यह रही कि इसी अभियान में शामिल माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और अजिंक्य रहाणे के वीडियो उपलब्ध रहे। इस कार्रवाई पर सवाल उठे कि अगर अभियान का मकसद प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाना था, तो सिर्फ दीया का वीडियो क्यों हटाया गया?
दीया ने इस पर कहा कि वीडियो सार्वजनिक जागरूकता के उद्देश्य से बनाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस काम के लिए कोई फीस नहीं ली। सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया थी, “कोई पैसे नहीं लिए हैं। भलाई का जमाना ही नहीं रहा।”
मेयर ने बताया हिंदू विरोधी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC को सुनाई खरी खरी
वीडियो हटाए जाने के बाद मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने दीया मिर्जा पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने अभिनेत्री को हिंदू विरोधी बताते हुए कहा कि हिंदुओं को दिवाली मनाने का तरीका सिखाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दीया को BMC के अभियानों से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी सवाल उठाया कि दीया दिवाली और होली पर पर्यावरण की बात करती हैं, लेकिन ईद, बकरीद और मुहर्रम जैसे मौकों पर वैसी अपील क्यों नहीं करतीं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
हालांकि, इन नेताओं के सवाल और आरोप अपने आप में दीया की मंशा का प्रमाण नहीं हैं। दूसरी तरफ, BMC की कार्रवाई पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताई। 3 नवंबर को अदालत ने वीडियो हटाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सार्वजनिक हित के अभियान को गुटबाजी का रंग नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत ने BMC को अभियान की सामग्री दोबारा पोस्ट करने को आदर्श कदम बताया और कहा कि ऐसे संदेशों का उद्देश्य समाज में जागरूकता और एकजुटता बढ़ाना है।
यानी जिस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ, उसके पीछे अदालत के निर्देश और सार्वजनिक स्वास्थ्य का उद्देश्य था। दीया का कहना है कि उन्होंने BMC और हाईकोर्ट के कहने पर यह वीडियो बनाया था और इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया। ऐसे में सवाल सिर्फ दीया से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से भी है जिसने एक सार्वजनिक जागरूकता अभियान के वीडियो को राजनीतिक आपत्ति के बाद हटा दिया।
पर्यावरण पर बयान और पितृसत्ता को जलवायु संकट से जोड़ने वाली थ्योरी
जून 2026 में दीया मिर्जा ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट ‘ऑल अबाउट हर’ में पर्यावरण पत्रकार अरति कुमार राव के साथ बातचीत के दौरान पितृसत्ता और जलवायु संकट के संबंध पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था ने सत्ता और संसाधनों के शोषण को बढ़ावा दिया है, जिसका असर प्रकृति और कमजोर समुदायों पर भी पड़ा है।
इस बयान पर भी सोशल मीडिया पर बहस हुई। कुछ लोगों ने उनके तर्क का समर्थन किया, जबकि कुछ ने सवाल किया कि जलवायु परिवर्तन जैसी जटिल समस्या को पितृसत्ता से जोड़ना कितना सही है। बाद में दीया ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं। उनके मुताबिक, यह बहस सिर्फ कार्बन उत्सर्जन की नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं की भी है जो प्रकृति और लोगों का शोषण करती हैं।
सवाल पर्यावरण की चिंता पर नहीं, उसके पैमाने और प्रस्तुति पर भी
दीया मिर्जा पर्यावरण संरक्षण पर लंबे समय से बोलती रही हैं। वह UN Environment की गुडविल एंबेसडर भी हैं। इसलिए प्रदूषण, पानी की बर्बादी या प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर उनकी आवाज उठना असामान्य नहीं है। किसी भी त्योहार में प्रदूषण या संसाधनों की बर्बादी पर सवाल उठाना गलत नहीं कहा जा सकता। लेकिन सार्वजनिक हस्तियों से यह अपेक्षा भी रहती है कि उनके संदेश व्यापक हों, भाषा समावेशी हो और उनका पैमाना सभी समुदायों के लिए एक जैसा दिखाई दे।
दीया के मामले में बहस का असली सिरा यही है। करवा चौथ पर कामकाजी पत्नी को लेकर पोस्ट, होली पर पानी बचाने की अपील और दिवाली पर पटाखों के खिलाफ वीडियो, इन तीनों मौकों पर उनके संदेशों को लेकर सवाल उठे हैं। लेकिन इन विवादों को जोड़ते हुए यह भी याद रखना होगा कि उनकी दिवाली वाली अपील अदालत के निर्देश पर चलाए जा रहे सार्वजनिक अभियान का हिस्सा थी और BMC ने उसी अभियान के दूसरे वीडियो नहीं हटाए।
तो क्या दीया मिर्जा के संदेशों की भाषा और समय पर सवाल उठाना गलत है? बिल्कुल नहीं। लेकिन क्या सिर्फ इन पोस्ट और अभियानों के आधार पर उन्हें हिंदू विरोधी करार देना उचित है? यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
आखिर पर्यावरण की चिंता किसी एक त्योहार की जागीर नहीं हो सकती और न ही किसी त्योहार पर सवाल उठाने का मतलब उस धर्म का विरोध होना चाहिए। असली कसौटी यही है कि जागरूकता का संदेश सबके लिए समान हो, और उस संदेश को सुनने तथा उस पर असहमति जताने का अधिकार भी सबके पास हो।
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Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
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