Naseeruddin Shah ने BJP को कहा ‘Bloody Jhooti Party’, बोले ‘बदला लेने पर उतारू’, पीयूष मिश्रा का झारखंड वाला तंज भी याद आया!
नसीरुद्दीन शाह ने बीजेपी को ‘ब्लडी झूठी पार्टी’ कहते हुए बंगाल चुनाव के बाद विरोधियों से बदला लेने का आरोप लगाया। उनके बयान के बीच पीयूष मिश्रा की झारखंड के छात्रों और कथित चुनिंदा सक्रियता को लेकर की गई पुरानी आलोचना भी चर्चा में है।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर अपने राजनीतिक बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने बीजेपी को ‘ब्लडी झूठी पार्टी’ कहते हुए आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद पार्टी अपनी विचारधारा से असहमत लोगों से बदला लेने पर उतारू है। शाह ने कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के छात्रों का समर्थन करते हुए यह बात कही। दिलचस्प बात यह है कि उनके इस बयान के बीच अभिनेता पीयूष मिश्रा की वह पुरानी आलोचना भी याद आ रही है, जिसमें उन्होंने शाह पर चुनिंदा मुद्दों पर ही आवाज उठाने का आरोप लगाया था। झारखंड के छात्रों की मदद के लिए कविता मिलने से लेकर दूसरे छात्र आंदोलनों पर चुप्पी तक, पीयूष ने उनसे कई तीखे सवाल किए थे।
‘ब्लडी झूठी पार्टी’, बीजेपी पर नसीरुद्दीन शाह का तीखा हमला
नसीरुद्दीन शाह ने 24 अक्टूबर को साझा किए गए एक वीडियो में बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत को ‘छल कपट से मिली जीत’ बताते हुए आरोप लगाया कि अब उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो पार्टी की विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं।
शाह के मुताबिक, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्र इस कथित कार्रवाई के ताजा निशाने बने हैं। उन्होंने दावा किया कि जवाबदेही की मांग करने वाले छात्रों को कारण बताओ नोटिस दिए गए, उन पर निगरानी रखी गई, उन्हें धमकाया गया और हॉस्टल खाली करने के लिए भी कहा गया।
शाह ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी अपने पक्ष में प्रचार करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि भविष्य के फिल्मकारों को अपने हिसाब से प्रभावित करने या डराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने नागरिकों से छात्रों की मांगों का समर्थन करने की अपील की।
हालांकि, ये आरोप शाह के बयान का हिस्सा हैं। मामले में छात्रों, संस्थान प्रशासन और संबंधित पक्षों के दावों को अलग अलग देखना जरूरी है।
आखिर SRFTI के छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?
कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्र परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं और प्रशासन की भूमिका को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र 12 अक्टूबर से संस्थान के कुलपति के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले परिसर में 27 सितंबर और 4 अक्टूबर को झड़पों की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद संस्थान के भीतर सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ गया। संस्थान ने शैक्षणिक गतिविधियों को 13 नवंबर तक निलंबित करने और छात्रों को परिसर खाली करने का निर्देश भी दिया था।
इसी विवाद के बीच नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के पक्ष में आवाज उठाई है। उनके बयान ने छात्र आंदोलन को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
जब पीयूष मिश्रा ने पूछा था, झारखंड के छात्रों के लिए क्या किया?
नसीरुद्दीन शाह और पीयूष मिश्रा के बीच बयानबाजी का मामला नया नहीं है। इसी महीने की शुरुआत में पीयूष मिश्रा ने शाह पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वह कुछ आंदोलनों में खुलकर सामने आते हैं, लेकिन दूसरे मामलों में उनकी सक्रियता नजर नहीं आती।
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब शाह मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। शाह की इस भागीदारी के बाद पीयूष मिश्रा ने एक वीडियो के जरिए उन पर निशाना साधा।
पीयूष ने झारखंड के छात्रों का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि उन्होंने वहां के छात्रों की मदद के लिए नसीरुद्दीन शाह से संपर्क किया था, लेकिन उनके मुताबिक, शाह ने जवाब में एक पाकिस्तानी शायरा की नज्म भेज दी। पीयूष का कहना था कि उस समय छात्रों को कविता नहीं, बल्कि आटा, दाल, रोटी और गुड़ जैसी बुनियादी चीजों की जरूरत थी।
उनकी इस टिप्पणी ने दोनों कलाकारों के बीच वैचारिक मतभेद को सार्वजनिक बहस में बदल दिया था। पीयूष ने शाह से यह भी सवाल किया था कि वह दूसरे छात्र आंदोलनों और घटनाओं पर भी अपनी राय क्यों नहीं रखते।
‘अब आप जब भी बयान देंगे, आपको जवाब मिलेगा’
पीयूष मिश्रा ने अपनी आलोचना में केवल झारखंड का मुद्दा ही नहीं उठाया था। उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में छात्रों से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए भी शाह से प्रतिक्रिया देने की मांग की थी। साथ ही, उन्होंने एक विमान के पायलट की तारीफ करने और दूसरे मामलों पर बोलने की अपील करते हुए शाह की सक्रियता पर सवाल उठाए थे।
पीयूष की आपत्ति का मूल सवाल यह था कि सार्वजनिक मुद्दों पर बोलने वाले प्रभावशाली लोगों को अलग अलग घटनाओं पर भी समान संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने अपने वीडियो के आखिर में साफ कहा था कि अब नसीरुद्दीन शाह जब भी कोई बयान देंगे, उन्हें उनका जवाब मिलेगा।
हालांकि, पीयूष के आरोप अपनी जगह हैं और शाह के किसी मुद्दे पर बोलने या न बोलने के पीछे की वजहों का पूरा आकलन केवल सार्वजनिक बयानों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
नसीरुद्दीन शाह के बयान से फिर गरमाई बहस
अब SRFTI के छात्रों के समर्थन में नसीरुद्दीन शाह के नए बयान ने राजनीतिक और फिल्मी हलकों में बहस को फिर तेज कर दिया है। एक तरफ शाह का कहना है कि असहमति रखने वालों को डराने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ पीयूष मिश्रा पहले ही उनकी मुद्दों को चुनने की शैली पर सवाल उठा चुके हैं।
इस पूरे विवाद में दो अलग सवाल सामने आते हैं। पहला, क्या फिल्म संस्थान के छात्रों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उचित कार्रवाई हो रही है? दूसरा, क्या सार्वजनिक हस्तियों की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता को हर मुद्दे पर एक ही कसौटी पर परखा जाना चाहिए?
फिलहाल नसीरुद्दीन शाह का बीजेपी पर हमला और पीयूष मिश्रा की पुरानी आलोचना, दोनों एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर छात्रों की शिकायतों, संस्थान की कार्रवाई और विवाद से जुड़े तथ्यों पर स्पष्टता आना भी उतना ही जरूरी है।
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Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
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