रावण के नाम पर कैसी नौटंकी? यामी गौतम की ‘नई नवेली’ में डायन का ड्रामा, रामायण का तड़का और आस्था के साथ खिलवाड़ का सवाल!
यामी गौतम की ‘नई नवेली’ में हॉरर, कॉमेडी और रामायण के संदर्भों का मेल कहानी को कितना मजेदार बनाता है? पढ़िए फिल्म का रिव्यू और जानिए क्यों इसे मिले सिर्फ 1.5 स्टार।
Nayyi Navelli Review: जब बॉलीवुड को हर कहानी में चाहिए हॉरर, ह्यूमर और धर्मग्रंथों का मसाला!
रेटिंग: ⭐ 1.5/5
बॉलीवुड को कहानी में नया मसाला चाहिए, तो हॉरर डाल दो, कॉमेडी छिड़क दो और ऊपर से धर्मग्रंथों का तड़का लगा दो! लेकिन जिन रामायण के पात्रों और प्रसंगों को करोड़ों लोग श्रद्धा से देखते-सुनते हैं, उन्हें एक अतरंगी कहानी का मसाला बना देना कितना सही है? यामी गौतम धर की ‘नई नवेली’ में मेरठ के एक परिवार की बहू पर डायन होने का शक होता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ते-बढ़ते रावण, मंदोदरी और भगवान राम तक पहुंच जाती है। कॉन्सेप्ट उत्सुकता जगाता है, मगर फिल्म देखते हुए सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि आगे क्या होगा। सवाल यह भी उठता है कि हमारे धर्मग्रंथों और मान्यताओं को पर्दे पर पेश करते समय रचनात्मकता की जिम्मेदारी आखिर कहां चली जाती है?
कहानी: बहू पर डायन होने का शक, फिर रावण की वापसी का प्लान!
मेरठ के अवस्थी परिवार में मोहिनी (यामी गौतम धर) बहू बनकर आती है। अपने व्यवहार से वह परिवार का दिल जीतने लगती है, लेकिन देवर बंटू (अनुराग ठाकुर) को उसकी अच्छाई में भी गड़बड़ नजर आती है। उसे शक है कि भाभी कोई साधारण इंसान नहीं, बल्कि डायन है। बंटू की इसी शंका से शुरुआती हिस्से में कुछ मजेदार सिचुएशन बनती हैं। लक्ष्मण रेखा वाला सीक्वेंस भी हंसाता है।
लेकिन फिर कहानी पति राजा (आदिनाथ एम. कोठारे), काल शील पत्थर और अलौकिक शक्तियों से होते हुए रावण की वापसी के रहस्य तक पहुंचती है। रावण, मंदोदरी और भगवान राम के संदर्भों के जरिए फिल्म त्रेता युग की कथा को आज के दौर से जोड़ना चाहती है। आइडिया में नवीनता है, लेकिन पटकथा में कसावट कम है। जितने रहस्य खुलते हैं, कहानी उतनी ही उलझती जाती है। बहू डायन है या नहीं, इस सवाल से शुरू हुआ खेल पौराणिक संदर्भों की ऐसी खिचड़ी बन जाता है, जिसमें स्वाद से ज्यादा सामग्री नजर आने लगती है।
धर्मग्रंथों का मसाला: बॉलीवुड, आस्था के साथ इतना हल्का क्यों हो जाता है?
फिल्म की सबसे विवादास्पद बात इसके पौराणिक संदर्भों को इस्तेमाल करने का तरीका है। रामायण सिर्फ कोई काल्पनिक फैंटेसी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक स्मृति और जीवन-मूल्यों का हिस्सा है। रावण, मंदोदरी और भगवान राम जैसे पात्रों को आधुनिक कहानी में नए नजरिए से पेश करना अपने आप में गलत नहीं है। कला को कल्पना की आजादी मिलनी चाहिए, सवाल पूछने की भी आजादी होनी चाहिए। लेकिन आजादी का मतलब यह नहीं कि हर गंभीर विषय को मनोरंजन की चटनी में डुबोकर परोस दिया जाए।
सवाल सीधा है—क्या बॉलीवुड दूसरे धर्मों के पवित्र ग्रंथों और धार्मिक प्रतीकों के साथ भी इसी तरह की सहजता दिखा पाएगा? यह किसी दूसरे धर्म को निशाना बनाने का सवाल नहीं, बल्कि रचनात्मकता में समान कसौटी और संवेदनशीलता की मांग है।
निराशा तब और बढ़ती है, जब आनंद एल. राय जैसे निर्माता, यामी गौतम जैसे कलाकार और लेखक इस तरह की परियोजनाओं का हिस्सा बनते हैं। किसी कलाकार की धार्मिक या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि यह तय नहीं करती कि उसे क्या बनाना चाहिए, लेकिन अपनी परंपराओं से जुड़े विषयों पर काम करते समय गहरी समझ और जिम्मेदारी की उम्मीद जरूर की जा सकती है। रामायण जैसे महाकाव्य में इतने चरित्र, संघर्ष, दर्शन और सवाल हैं कि उनसे गंभीर, आधुनिक और प्रभावशाली कहानियां बनाई जा सकती हैं। फिर आस्था से जुड़े संदर्भों को सिर्फ सनसनीखेज ट्विस्ट बनाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
आस्था पर आधारित कहानी बनाना और आस्था को हल्का करके पेश करना दो अलग बातें हैं। फिल्म को अपनी कल्पना इस्तेमाल करने का हक है, लेकिन दर्शकों को यह सवाल पूछने का भी हक है कि क्या इस कल्पना में विषय की गरिमा और गहराई के लिए पर्याप्त जगह थी? ‘नई नवेली’ इस बहस को जन्म देती है, मगर अपने पौराणिक कॉन्सेप्ट को उस स्तर की समझ और मजबूत लेखन के साथ पेश नहीं कर पाती, जिसकी उससे उम्मीद की जा सकती थी।
स्क्रीनप्ले: पहले हाफ में हंसी, दूसरे में कहानी की ऐसी-तैसी!
निर्देशक बालाजी मोहन ने फैमिली ड्रामा, कॉमेडी, हॉरर और पौराणिक रहस्य को एक साथ रखने की कोशिश की है। शुरुआती हिस्से में यह प्रयोग कुछ हद तक काम करता है। बंटू का शक, मोहिनी का रहस्यमयी अंदाज और परिवार की खींचतान दर्शकों को बांधे रखते हैं। फिल्म में महिलाओं को आत्मविश्वास और सम्मान दिलाने वाला पहलू भी अच्छा है।
लेकिन इंटरवल के बाद कहानी का संतुलन बिगड़ने लगता है। पौराणिक संदर्भों और अलौकिक शक्तियों का विस्तार तो होता है, पर रोमांच उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। हॉरर-कॉमेडी में डर और हंसी का सही तालमेल जरूरी है, लेकिन यहां कई दृश्य न तो डराते हैं, न ही खुलकर हंसाते हैं। राजा का राक्षसी रूप, लाल आंखें, नुकीले दांत और हरी नसें कुछ जगह इतने नाटकीय लगते हैं कि खौफ की जगह अजीब-सा एहसास पैदा होता है।
फिल्म का कॉन्सेप्ट बड़ा है, लेकिन स्क्रीनप्ले उसे संभालने में कमजोर पड़ता है। कहानी को बार-बार नए मोड़ देने के बजाय किरदारों और उनके रहस्यों को गहराई से विकसित किया जाता, तो असर कहीं बेहतर हो सकता था।
एक्टिंग: यामी ने संभाला रहस्य, अनुराग ने बचाई हंसी
यामी गौतम धर मोहिनी के किरदार में आत्मविश्वास और रहस्य बनाए रखती हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है, लेकिन कमजोर लेखन किरदार को पूरी तरह खुलने नहीं देता। कई जगह लगता है कि कलाकार मेहनत कर रहा है, मगर कहानी उसे पूरी ताकत से चमकने का मौका ही नहीं दे रही।
अनुराग ठाकुर बंटू के रूप में फिल्म के सबसे मनोरंजक हिस्सों में शामिल हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और भाभी को लेकर शक कई दृश्यों को मजेदार बनाता है। फिल्म जब पौराणिक उलझनों में गंभीर होने लगती है, तब अनुराग का अंदाज राहत देता है।
आदिनाथ एम. कोठारे भावनात्मक दृश्यों में ठीक हैं, लेकिन उनका गुस्सा और चीखना कुछ जगह दोहराव वाला लगता है। सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ और सुष्मिता मुखर्जी जैसे कलाकार भी मौजूद हैं, मगर फिल्म उनकी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती।
म्यूजिक: ‘फटा पटाखा’ चला, बाकी गाने फीके
जीवी प्रकाश कुमार का संगीत फिल्म की अतरंगी दुनिया के हिसाब से फिट बैठता है। ‘फटा पटाखा’ ध्यान खींचता है, लेकिन बाकी गाने ज्यादा देर याद नहीं रहते। बैकग्राउंड स्कोर रहस्य का माहौल बनाने की कोशिश करता है, मगर कमजोर पटकथा की भरपाई संगीत भी नहीं कर पाता।
फाइनल वर्डिक्ट: आस्था का सवाल बड़ा, फिल्म का असर छोटा
‘नई नवेली’ के पास अनोखा कॉन्सेप्ट, यामी की रहस्यमयी मौजूदगी और अनुराग ठाकुर की कॉमेडी है। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, बिखरा दूसरा हाफ और पौराणिक संदर्भों का सतही इस्तेमाल फिल्म को निराशाजनक बना देते हैं। रामायण जैसे समृद्ध महाकाव्य से प्रेरणा लेना गलत नहीं, लेकिन उसे कहानी में उतारने के लिए सिर्फ ट्विस्ट नहीं, समझ और संवेदनशीलता भी चाहिए। रावण को वापस लाने निकली फिल्म अपनी कहानी को ही मजबूती से खड़ा नहीं कर पाती।
रेटिंग: ⭐ 1.5/5
Loved this story? Share with your friends!
Spread the word across your favorite social networks.
Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
🔥 Related Articles & Recommended Stories
More stories from Bollywood
चेतन भगत की कलाई में दर्द था? मंच पर डॉ. राजनीश कांत ने किया लाइव ट्रीटमेंट, लेखक बोले- राहत मिली; लॉन्च हुई ‘Chiropractor & Physiotherapist’ किताब
मुंबई में लेखक चेतन भगत ने डॉ. राजनीश कांत की किताब ‘Chiropractor & Physiotherapist’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में डॉ. कांत ने चेतन भगत की कलाई पर लाइव एडजस्टमेंट तकनीक का प्रदर्शन किया। भगत ने इसके बाद राहत महसूस होने की बात कही।
रणबीर कपूर ने कन्नड़ में कम बोल पाने के लिए मांगी माफी, यश को कहा ‘बॉस’; बोले- अगली बार आपसे ज्यादा सीखकर आऊंगा!
‘रामायण’ के इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च पर रणबीर कपूर ने कन्नड़ में दर्शकों से बात की और ज्यादा नहीं बोल पाने के लिए माफी मांगी। यश को ‘बॉस’ कहकर उन्होंने कहा कि अगली बार उनसे और ज्यादा सीखकर आएंगे। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
इमरान खान बोले- सरकार के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट जाएंगे, बोले- सिर्फ प्रदर्शन करने पर देश छोड़ने को नहीं कह सकते! गजेंद्र चौहान ने बताया ‘गद्दार’, पायल रोहतगी ने कहा ‘बेरोजगार एक्टर’
इमरान खान भारत छोड़ने के नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं। उनके वकीलों ने कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इस बीच गजेंद्र चौहान ने उन्हें ‘गद्दार’ कहा, पायल रोहतगी ने ‘बेरोजगार एक्टर’ बताया, जबकि रज़ा मुराद, अशोक पंडित, किरण राव और सबा आजाद के बयान भी चर्चा में हैं।
पहले ट्रेलर के बाद अब ‘रामायणम्’ में क्या नया? रणबीर के राम ने उठाया धनुष, यश के रावण के सामने बिछे योद्धा; 6 भाषाओं में आया इंटरनेशनल ट्रेलर
‘रामायणम्’ का इंटरनेशनल ट्रेलर छह भाषाओं में रिलीज हुआ। रणबीर कपूर के राम, यश के रावण, इंद्र के ऐरावत पर हमले और जटायु के युद्ध की झलक ने बढ़ाई उत्सुकता।