'25 साल में पहली बार आमिर खान के मुंह से गाली सुनी थी'; प्रदीप रावत का वो किस्सा, जो अब हमेशा याद रहेगा
'गजनी' के विलेन प्रदीप रावत के निधन के बाद उनके कई अनसुने किस्से फिर चर्चा में हैं। जानिए क्यों उन्होंने कहा था कि 25 साल में पहली बार आमिर खान के मुंह से गाली सुनी और कैसे 'गजनी' उनके करियर की सबसे यादगार फिल्म बनी।
एक ऐसा विलेन, जो पर्दे के पीछे भी कई कहानियों का गवाह था
'गजनी' का नाम लेते ही आमिर खान के साथ जिस चेहरे की सबसे पहले याद आती है, वह प्रदीप रावत का है। लेकिन पर्दे पर खौफ पैदा करने वाला यह अभिनेता असल जिंदगी में बेहद शांत और सरल स्वभाव का इंसान था। 74 साल की उम्र में ब्लड कैंसर से उनका निधन हो गया, लेकिन उनके साथ जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं जो शायद नई पीढ़ी ने कभी सुनी ही नहीं।
'25 साल में पहली बार आमिर खान के मुंह से गाली सुनी थी'
प्रदीप रावत ने एक इंटरव्यू में 'गजनी' की शूटिंग का ऐसा किस्सा सुनाया था, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया था।
उन्होंने बताया था कि क्लाइमैक्स की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन में आमिर खान बुरी तरह घायल हो गए थे। दर्द इतना असहनीय था कि 25 साल की दोस्ती में पहली बार उन्होंने आमिर खान के मुंह से गाली सुनी। प्रदीप रावत के मुताबिक, आमिर बेहद शांत और संयमित इंसान थे। उन्होंने उन्हें कभी किसी पर गुस्सा करते नहीं देखा था, लेकिन उस दिन दर्द ने उन्हें भी बेबस कर दिया था।
'गजनी' के लिए आमिर का नाम आगे बढ़ाने की कहानी
बहुत कम लोग जानते हैं कि जब 'गजनी' के हिंदी रीमेक की चर्चा चल रही थी, तब अलग-अलग सितारों के नाम सामने आ रहे थे।
प्रदीप रावत ने बाद में बताया था कि उन्हें शुरू से लगता था कि यह किरदार आमिर खान के अलावा कोई और उतनी गहराई से नहीं निभा पाएगा। उन्होंने निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस से भी अपनी यही राय साझा की थी। बाद में आमिर इस फिल्म का हिस्सा बने और 'गजनी' हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर्स में शामिल हो गई।
'महाभारत' के अश्वत्थामा से शुरू हुआ सफर
आज की पीढ़ी उन्हें 'गजनी' के विलेन के रूप में जानती है, लेकिन उनकी पहली बड़ी पहचान टीवी के सबसे लोकप्रिय धारावाहिक 'महाभारत' से मिली थी।
बी.आर. चोपड़ा की इस सीरीज में उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया था। कम स्क्रीन टाइम के बावजूद उनके अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी और यहीं से फिल्मों का सफर शुरू हुआ।
जब साउथ सिनेमा ने बना दिया सुपरस्टार विलेन
हिंदी फिल्मों के अलावा प्रदीप रावत ने तेलुगु और तमिल फिल्मों में भी ऐसी पहचान बनाई, जो बहुत कम हिंदी कलाकारों को नसीब होती है।
'Sye', 'Chatrapathi', 'Desamuduru', 'Stalin' और कई सुपरहिट फिल्मों में उनके निभाए किरदार आज भी याद किए जाते हैं। कई बार दर्शक फिल्म के हीरो से ज्यादा उनके विलेन वाले अंदाज की चर्चा करते थे।
हीरो नहीं थे, लेकिन हर हीरो को और बड़ा बना देते थे
प्रदीप रावत उन कलाकारों में शामिल थे, जिनकी मौजूदगी किसी भी फिल्म के स्तर को ऊंचा कर देती थी। आमिर खान, शाहरुख खान, सनी देओल, अजय देवगन और दक्षिण भारतीय सिनेमा के कई बड़े सितारों के साथ काम करते हुए उन्होंने हमेशा अपने किरदार को यादगार बनाया।
उनकी भारी आवाज, तीखी आंखें और सधा हुआ अभिनय उन्हें भीड़ से अलग बनाता था। शायद यही वजह थी कि उनका चेहरा देखते ही दर्शकों को समझ आ जाता था कि अब कहानी में असली टकराव शुरू होने वाला है।
आखिरी लड़ाई भी बहादुरी से लड़ी
प्रदीप रावत लंबे समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने बीमारी से एक बार वापसी भी की, लेकिन हाल के महीनों में उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। आखिरकार उन्होंने जिंदगी की आखिरी जंग हार दी।
उनके पीछे पत्नी कल्याणी और दो बेटे हैं। परिवार हमेशा लाइमलाइट से दूर रहा, जबकि प्रदीप रावत ने भी निजी जिंदगी को कभी सुर्खियों का हिस्सा नहीं बनने दिया।
एक ऐसा कलाकार, जिसे विलेन कहना शायद कम होगा
भारतीय सिनेमा में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ चेहरे किरदारों से बड़े हो जाते हैं। प्रदीप रावत उन्हीं में से एक थे।
'महाभारत' के अश्वत्थामा, 'सरफरोश', 'लगान', 'गजनी' और साउथ की दर्जनों फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि एक मजबूत अभिनेता को हीरो बनने की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी सबसे ज्यादा तालियां उस कलाकार के हिस्से में आती हैं, जो पर्दे पर सबसे खतरनाक नजर आता है।
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