रामायण पार्ट वन रिव्यू: भगवानों की लीग, राक्षसों का स्वैग और 4000 करोड़ का सिनेमा!
4000 करोड़ की महागाथा, रणबीर कपूर का राम और यश का रावण! नितेश तिवारी की रामायण पार्ट वन भव्यता और शानदार VFX से चौंकाती है, लेकिन क्या यह दिल को भी छू पाती है? पढ़िए पूरा रिव्यू।
रेटिंग: 3.5/5 | ड्यूरेशन: 3 घंटे 15 मिनट
कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिनका क्लाइमैक्स सबको पता होता है, फिर भी उन्हें देखने की बेचैनी कम नहीं होती। रामायण भी ऐसी ही कहानी है। फर्क बस इतना है कि इस बार किस्सा सुनाने के लिए बजट करीब 4000 करोड़ रुपये का है, स्क्रीन बड़ी है और दांव उससे भी बड़ा। नितेश तिवारी की ‘रामायण पार्ट वन’ आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहां देवताओं का वैभव है, राक्षसों का रौब है और हर किरदार के साथ सदियों का भावनात्मक कनेक्शन है। फिल्म कई बार आंखें खोलकर देखने पर मजबूर करती है, लेकिन हर बार दिल तक पहुंचने में कामयाब नहीं होती।
एंट्री राम की नहीं, रावण के रुतबे की है!
फिल्म की शुरुआत रावण के जलवे से होती है। तपस्या, ब्रह्मा का वरदान, इंद्र को चुनौती और कुबेर से लंका छीनने तक का सफर। यहां रावण सिर्फ दस सिरों वाला किरदार नहीं, बल्कि अपनी ताकत के नशे में चूर एक ऐसा सम्राट है जिसे अपनी सीमाओं का अंदाजा ही नहीं। इसके बाद कहानी राम के जन्म, सीता स्वयंवर, वनवास और सीता हरण तक पहुंचती है। पहला भाग यहीं ठहरता है। यानी अभी राम और रावण आमने सामने नहीं आए हैं, लेकिन अगली भिड़ंत का माहौल तैयार है। पोस्ट क्रेडिट में हनुमान जी की झलक और ‘जय श्री राम’ की गूंज फिल्म खत्म होने के बाद भी थिएटर में उत्सुकता छोड़ जाती है।
रणबीर में राम की मर्यादा, यश में रावण का स्वैग!
रणबीर कपूर के राम में एक ठहराव है। वह किरदार को शोर या अतिरिक्त नाटकीयता से नहीं, बल्कि गंभीरता और गरिमा से निभाते हैं। साई पल्लवी सीता के रूप में सहज लगती हैं। लेकिन यश की बात अलग है। उनकी एंट्री के साथ स्क्रीन पर एक अलग ही रौब दिखाई देता है। आवाज में दम, आंखों में अहंकार और चाल में सम्राट वाला आत्मविश्वास। उनका रावण खतरनाक भी है और आकर्षक भी। वह जब फ्रेम में होते हैं तो नजरें उन पर टिक जाती हैं। रणबीर और यश दोनों अपने किरदारों के अलग मिजाज को पकड़ते हैं। यही इस फिल्म की कास्टिंग की खूबसूरती है।
4000 करोड़ का फ्रेम, कहानी को भी चाहिए था उतना दम!
नितेश तिवारी ने दुनिया बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अयोध्या हो या लंका, हर जगह भव्यता का पूरा इंतजाम है। लेकिन कहानी की रफ्तार हर जगह इस स्केल का साथ नहीं देती। कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा ठहरते हैं और कुछ संवाद ऐसे हैं जिनसे उम्मीद थी कि वे सीधे यादों में दर्ज हो जाएंगे, लेकिन वे आते हैं और गुजर जाते हैं। रामायण के पास पहले से इतने प्रभावशाली प्रसंग हैं, ऐसे में स्क्रीनप्ले से उम्मीद थी कि हर दृश्य अपना अलग असर छोड़ेगा। यहां कुछ मौके हाथ से निकलते नजर आते हैं।
VFX का जलवा, बस कुछ जगह जादू गायब!
लंका की चमक, अयोध्या की भव्यता और पौराणिक दुनिया का विस्तार कई दृश्यों में कमाल का है। VFX फिल्म को सचमुच बड़े पर्दे का अनुभव बनाते हैं। कुछ फ्रेम ऐसे हैं जिन्हें देखकर लगता है कि भारतीय सिनेमा अब अपने पौराणिक संसार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का आत्मविश्वास रखता है। हालांकि कुछ राक्षसों और क्रिएचर्स के विजुअल्स में कृत्रिमता दिखती है। यानी ज्यादातर जगह जादू चलता है, लेकिन कुछ जगह कंप्यूटर की मेहनत जादू पर भारी पड़ जाती है।
रहमान और जिमर से धुन मांगी थी, यादगार थीम नहीं मिली!
ए.आर. रहमान और हंस जिमर का नाम सुनकर उम्मीद थी कि संगीत भी फिल्म की तरह विशाल होगा। कोई ऐसी धुन होगी जो राम के साथ मन में बसेगी और रावण के साथ रोंगटे खड़े करेगी। लेकिन यहां मामला थोड़ा ठंडा पड़ता है। बैकग्राउंड स्कोर में वह भावनात्मक उफान नहीं मिलता जिसकी इस महागाथा को जरूरत थी। फिल्म खत्म होने के बाद भी कोई ऐसी थीम जेहन में नहीं बजती जिसे आप गुनगुनाना चाहें। इतने बड़े सिनेमाई आयोजन में संगीत का इतना फीका रह जाना खलता है।
फैसला: जय श्री राम कहने लायक भव्यता, कुछ शिकायतों के साथ!
‘रामायण पार्ट वन’ में कमियां हैं, लेकिन इसे सिर्फ उन कमियों के तराजू पर तौलना ठीक नहीं होगा। रणबीर की गरिमा, यश का रौद्र अंदाज, शानदार VFX और कहानी के भावनात्मक प्रसंग इसे थिएटर में देखने लायक बनाते हैं। हां, स्क्रीनप्ले में कसावट और संगीत में याद रह जाने वाली धुन होती तो यह अनुभव एक अलग ही मुकाम पर पहुंच सकता था। फिलहाल पहला भाग अपनी भव्य दुनिया से प्रभावित करता है और सबसे बड़ी बात, असली टकराव के लिए आपको इंतजार करने पर मजबूर कर देता है। रामायण का पहला अध्याय खत्म हुआ है, महायुद्ध अभी बाकी है!
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Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
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