नाना पाटेकर नहीं रहे: 45 मिनट तक जिंदगी की जंग, 35 रुपए से शुरू हुआ सफर… कभी जवानों के बीच पहुंचे, कभी ‘उदय शेट्टी’ बनकर हंसाया
नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश हुई। जानिए 35 रुपए से शुरू हुआ उनका संघर्ष और फिल्मी सफर।
मुंबई। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गए। सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया।
नाना का जाना इसलिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि वह उन कलाकारों में थे जिन्हें सिर्फ ‘स्टार’ कहना उनकी पूरी शख्सियत को छोटा कर देता है। वह अभिनेता थे, निर्देशक थे, लेखक थे और पर्दे से बाहर भी अपनी बेबाक जिंदगी के लिए उतने ही चर्चित रहे।
35 रुपए महीने से शुरू हुआ था सफर
आज जिस नाना पाटेकर की करोड़ों की फिल्मों और बड़े किरदारों से पहचान है, उनकी शुरुआत बेहद मुश्किल हालात से हुई थी।
बचपन में परिवार की आर्थिक हालत खराब हो गई थी। नाना स्कूल के बाद फिल्मों के पोस्टर पेंट करने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें करीब 35 रुपए और एक वक्त का खाना मिलता था।
वह घंटों पैदल चलकर काम पर जाते थे। उस दौर की गरीबी ने नाना को जिंदगी को करीब से देखने का मौका दिया और शायद यही वजह रही कि बाद में उनके अभिनय में आम आदमी का दर्द इतना असली नजर आया।
एक्टिंग स्कूल नहीं, जिंदगी बनी उनकी असली ट्रेनिंग
नाना के अभिनय की खासियत यही थी कि वह किरदार को सिर्फ निभाते नहीं थे, उसे जीते हुए लगते थे।
‘क्रांतिवीर’ का गुस्सा हो, ‘अब तक छप्पन’ का ठंडा अंदाज हो या ‘नटसम्राट’ का टूटता हुआ इंसान—उनके किरदारों में एक ऐसा सच दिखाई देता था, जिसे देखकर दर्शक भूल जाता था कि सामने कोई अभिनेता है।
उनकी आवाज भी उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई थी। सामान्य सा संवाद भी नाना के मुंह से निकलता था तो उसका वजन बढ़ जाता था।
कारगिल में फिल्मी स्टार नहीं, सैनिक बनकर पहुंचे
नाना पाटेकर की जिंदगी का शायद सबसे दिलचस्प किस्सा फिल्मों से बाहर का है।
कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सेना के जवानों के बीच जाने की इच्छा जताई थी। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से संपर्क किया। नाना पहले भी सेना से जुड़ा प्रशिक्षण ले चुके थे और बाद में उन्हें कारगिल में जवानों के साथ समय बिताने का मौका मिला।
उन्होंने बाद में बताया था कि वह मोर्चे के पास रहे और सैनिकों के साथ वक्त बिताया। यह किस्सा नाना की उस छवि को दिखाता है, जो कैमरे के सामने नजर आने वाले अभिनेता से कहीं बड़ी थी।
‘परिंदा’ से मिला नेशनल अवॉर्ड, फिर ‘क्रांतिवीर’ ने बना दिया आइकॉन
नाना पाटेकर ने 1978 में ‘गमन’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’, ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।
उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। 2013 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
लेकिन नाना की पहचान सिर्फ पुरस्कारों से नहीं बनी। उनकी पहचान बनी उनकी आवाज से, संवाद बोलने के अंदाज से और उस अभिनय से जिसमें किरदार के अंदर का गुस्सा, दर्द और बेबसी एक साथ दिखाई देती थी।
जिस अभिनेता ने ‘वेलकम’ में अपनी ही इमेज पलट दी
नाना को गंभीर और तीखे किरदारों के लिए जाना जाता था। लेकिन फिर आया ‘उदय शेट्टी’।
‘वेलकम’ में नाना पाटेकर का उदय शेट्टी वाला अंदाज इतना लोकप्रिय हुआ कि नई पीढ़ी के दर्शकों ने उन्हें एक बिल्कुल अलग रूप में देखा।
एक तरफ ‘क्रांतिवीर’ का आक्रोश, दूसरी तरफ ‘वेलकम’ की कॉमिक टाइमिंग—यही नाना की रेंज थी।
वह चाहते तो पूरी जिंदगी सिर्फ गंभीर किरदारों के भरोसे रह सकते थे, लेकिन उन्होंने कॉमेडी में भी ऐसा रंग भरा कि ‘उदय शेट्टी’ खुद एक पॉप कल्चर कैरेक्टर बन गया।
‘नटसम्राट’ में खुद से भी आगे निकल गए
मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में नाना ने रंगमंच के दिग्गज कलाकार गणपत बेलवलकर का किरदार निभाया।
यह सिर्फ एक किरदार नहीं था। उम्र, अकेलापन, परिवार, सम्मान और जिंदगी के आखिरी पड़ाव की टूटन—नाना ने इसे जिस तरह पर्दे पर उतारा, वह उनके करियर के सबसे यादगार अभिनय में गिना गया।
यही नाना की खूबी थी—वह किरदार को बड़ा नहीं बनाते थे, किरदार उनके अभिनय से बड़ा हो जाता था।
किसानों के लिए भी खोला मोर्चा
नाना पाटेकर की जिंदगी का एक और अहम अध्याय सामाजिक काम से जुड़ा रहा।
उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 2015 में NAAM Foundation शुरू की। महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं, पानी की कमी, सूखे और ग्रामीण विकास से जुड़े काम इस संस्था की प्रमुख पहलों में रहे हैं।
यानी जिस इंसान ने बचपन में गरीबी देखी थी, उसने बाद में अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जिनकी आवाज अक्सर बड़े शहरों तक नहीं पहुंचती थी।
निजी जिंदगी में भी हमेशा सुर्खियों से दूर रहे
नाना पाटेकर की निजी जिंदगी हमेशा बाकी फिल्मी सितारों से थोड़ी अलग रही। वह ग्लैमर और दिखावे से दूरी बनाए रखने के लिए जाने जाते थे।
पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ उनका रिश्ता भी लंबे समय से निजी रहा। दोनों कई वर्षों से अलग रह रहे थे, लेकिन उनका तलाक नहीं हुआ था।
आखिरी दौर में भी कैमरे से रिश्ता नहीं टूटा
75 साल की उम्र तक नाना काम करते रहे। हाल के वर्षों में भी वह फिल्मों और दूसरे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बने रहे।
जिस कलाकार ने जिंदगी की शुरुआत 35 रुपए की कमाई से की थी, उसने आखिरी दौर तक कैमरे के सामने अपनी मौजूदगी बनाए रखी।
35 रुपए से शुरू हुई जिंदगी, नेशनल अवॉर्ड और पद्मश्री तक पहुंची; कभी ‘क्रांतिवीर’ बनकर गुस्सा दिखाया, कभी ‘उदय शेट्टी’ बनकर हंसाया और असल जिंदगी में किसानों और जवानों के बीच खड़े नजर आए।
नाना पाटेकर का जाना सिर्फ एक अभिनेता का निधन नहीं है। यह उस दौर के एक ऐसे कलाकार की विदाई है, जिसे स्टार बनने के लिए स्टारडम की जरूरत ही नहीं पड़ी।
Loved this story? Share with your friends!
Spread the word across your favorite social networks.
Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
🔥 Related Articles & Recommended Stories
More stories from Bollywood
नाना पाटेकर ने रात 2:30 बजे दोस्त को किया था मैसेज- ‘असहज महसूस कर रहा हूं’, 4 बजे तक हालत बिगड़ी; डॉक्टर ने बताया आखिरी 3 घंटे में क्या हुआ
नाना पाटेकर ने निधन से कुछ घंटे पहले रात 2:30 बजे दोस्त को मैसेज किया था। सीने में दर्द और पसीने के बाद हालत बिगड़ी। डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में 45 मिनट तक CPR किया गया।
पीएम मोदी ने कहा- नाना पाटेकर का जाना गहरा शून्य, फडणवीस बोले- पर्दे पर जितने बड़े, दिल से भी उतने ही बड़े; शिंदे ने कहा- महाराष्ट्र का अभिमान खो गया
नाना पाटेकर के निधन से बॉलीवुड और महाराष्ट्र में शोक की लहर है। पीएम मोदी, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, नितिन गडकरी समेत फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
नाना पाटेकर के जाने से सूना हुआ सिनेमा: पीछे छोड़ गए पत्नी-बेटे का परिवार, ‘परिंदा’ के अन्ना से ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी तक यादगार किरदार और डायलॉग
नाना पाटेकर की जिंदगी के अनसुने पहलू, पत्नी नीलकांति और बेटे मल्हार से जुड़ी कहानी, उनकी यादगार फिल्में और वो डायलॉग जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
जया बच्चन के वायरल VIDEO पर कंगना रनौत का तंज, बोलीं- ‘पूरी दुनिया के सामने बात रखने धरने पर बैठीं, फिर कहा- नहीं बताऊंगी’
INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान जया बच्चन का एक वीडियो वायरल हुआ, जिस पर कंगना रनौत ने तंज कसा। कंगना की टिप्पणी के बाद मामला फिर सुर्खियों में है।