प्रेम कीटाणु रिव्यू: प्यार का कीड़ा लगा जरूर, लेकिन कहानी ने बीच रास्ते में दिमाग का दही कर दिया!
प्रेम कीटाणु रिव्यू:वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की इस लव स्टोरी में रोमांस और कॉमेडी के बीच कहानी कई जगह लड़खड़ा जाती है। निखिल विजय सबसे बड़ी राहत हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, लूपहोल्स और खिंची हुई रफ्तार फिल्म का मजा किरकिरा कर देते हैं।
OnScreenBuzz.com रेटिंग: ⭐½/5 | अवधि: 2 घंटे 18 मिनट
कॉलेज की मस्ती, पहली मोहब्बत, दोस्ती और जिंदगी की जद्दोजहद... सुनने में ‘प्रेम कीटाणु’ का पैकेज काफी दिलचस्प लगता है। लेकिन फिल्म देखने के बाद सवाल यही आता है कि इतने सारे मसाले डालने के बाद भी स्वाद आखिर आया क्यों नहीं?
कहानी में प्रेम कम, लूपहोल्स ज्यादा
कहानी बनारस के इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरू होती है, जहां विशाल और सुहानी की पहली मुलाकात ही नोकझोंक से होती है। दोनों एक दूसरे को चार साल तक सिंगल रहने का श्राप दे देते हैं। इसके बाद दोनों अलग कॉलेज, अलग जिंदगी और अलग रास्तों पर चले जाते हैं।
चार साल बाद दोनों फिर मिलते हैं और यहीं से प्यार, करियर, दोस्ती और परिवार का खेल शुरू होता है।
समस्या ये है कि फिल्म के पास कहानी तो है, लेकिन उसे ढंग से बांधने वाली पकड़ नहीं है। कई घटनाएं जबरदस्ती आती हैं, कई फैसले समझ नहीं आते और कहानी में इतने लूपहोल्स हैं कि दर्शक किरदारों की लव लाइफ से ज्यादा स्क्रीनप्ले की हालत पर ध्यान देने लगता है।
फिल्म कई बार लगता है कि अब कुछ मजेदार होने वाला है, लेकिन फिर कहानी एक और मोड़ लेकर उसी जगह लौट आती है।
वीर ठीक, आफिया फ्रेश, निखिल विजय ने बचाई लाज
वीर पहाड़िया पूरी फिल्म में ठीक ठाक हैं। उनमें एनर्जी है, लेकिन उनका किरदार ऐसा असर नहीं छोड़ता कि दर्शक पूरी तरह उसके साथ जुड़ जाए।
आफिया सैयद फ्रेश लगती हैं और अपनी पहली फिल्म में ठीक काम करती हैं। वीर के साथ उनकी केमिस्ट्री भी कुछ हिस्सों में अच्छी लगती है।
लेकिन निखिल विजय फिल्म की असली जान हैं। मगन अरोड़ा बनकर उनकी कॉमिक टाइमिंग और वीर के साथ झगड़बंदी कई जगह फिल्म को डूबने से बचाती है। उनके आते ही स्क्रीन पर थोड़ी जान और थोड़ी हंसी दोनों लौटती हैं।
राकेश बेदी भी अपने अनुभव से फिल्म के कई हिस्से संभाल लेते हैं।
वहीं अपारशक्ति खुराना जैसे कलाकार से जिस सहजता की उम्मीद रहती है, यहां वह कई जगह ओवर ड्रामा में बदल जाती है। परफॉर्मेंस में एनर्जी तो है, लेकिन कई सीन में वह जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती है।
डायरेक्शन और राइटिंग में सबसे बड़ी दिक्कत
अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म को यूथफुल रखने की कोशिश की है, लेकिन डायरेक्शन कहानी पर मजबूत पकड़ नहीं बना पाता।
दीपक किंगरानी की राइटिंग में प्यार के साथ दोस्ती और परिवार को भी जगह दी गई है, लेकिन स्क्रीनप्ले बार बार पटरी से उतरता है। कई सीन ऐसे हैं जिनका कहानी में होना जरूरी ही नहीं लगता।
फिल्म का सबसे बड़ा लूपहोल यही है कि यह खुद तय नहीं कर पाती कि इसे लव स्टोरी बनना है, कॉमेडी करनी है या फैमिली ड्रामा।
म्यूजिक भी रफ्तार का दुश्मन
एक गाना ठीक लगता है, लेकिन बाकी गाने कहानी में घुलने के बजाय उसकी रफ्तार रोकते हैं।
कई जगह ऐसा लगता है कि कहानी आगे बढ़ने वाली है और तभी गाना आकर ब्रेक लगा देता है। ऊपर से कुछ गाने कहानी के माहौल में इतने नेचुरल नहीं लगते कि उनका असर और कम हो जाता है।
प्रोडक्शन वैल्यू भी नहीं बचा पाती फिल्म
यूथफुल लव स्टोरी के लिए जिस तरह की विजुअल चमक और सिनेमाई फील चाहिए, फिल्म वहां भी थोड़ी हल्की लगती है। कुछ लोकेशंस और शूट में वह ग्रैंडनेस नहीं दिखती जो बड़े पर्दे पर फिल्म को खास बना सके।
फाइनल वर्डिक्ट
‘प्रेम कीटाणु’ में प्यार का कीड़ा तो है, लेकिन कहानी की कमजोरी, लूपहोल्स, खिंची हुई रफ्तार और फीके गानों ने इस रोमांस को ऐसा बना दिया कि इंटरवल तक आते आते दर्शक खुद पूछने लगता है, आखिर ये चल क्या रहा है?
Loved this story? Share with your friends!
Spread the word across your favorite social networks.
Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
🔥 Related Articles & Recommended Stories
More stories from Bollywood
सलमान खान से मिलने के लिए अचानक दौड़ा फैन, बॉडीगार्ड ने पकड़कर हटाया; VIDEO में दिखा ऐसा पल कि एक्टर भी चौंक गए
सलमान खान से मिलने के लिए एक फैन अचानक उनकी तरफ दौड़ पड़ा। बॉडीगार्ड ने तुरंत उसे पकड़कर दूर हटाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
प्रेम कीटाणु की स्क्रीनिंग में सलमान खान ने जीता दिल, एक्ट्रेस के लिए पीछे खड़े होकर किया इंतजार, फिर वीर पहाड़िया को लगाया गले
‘प्रेम कीटाणु’ की स्क्रीनिंग में सलमान खान का एक खास अंदाज चर्चा में है। साक्षी मलिक के रेड कार्पेट पोज पूरे होने का इंतजार किया, फिर वीर पहाड़िया से मिले और उन्हें गले लगाया।
दृश्यम द कॉन्क्लूजन रिव्यू: अजय देवगन और जयदीप अहलावत की भिड़ंत दमदार, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले ने विजय सलगांवकर की आखिरी बाजी फीकी कर दी
दृश्यम द कॉन्क्लूजन में 23 जुलाई का रहस्य कहानी में नया ट्विस्ट लाता है, लेकिन सुविधाजनक ट्विस्ट और कमजोर इमोशनल कनेक्ट पुराने दृश्यम वाला जादू बरकरार नहीं रख पाते।
Drishyam 3 Advance Booking: 11 लाख से ज्यादा टिकट बिकीं, ₹37 करोड़ पार हुई कमाई; ₹50 करोड़ Opening की तैयारी
Ajay Devgn की Drishyam: The Conclusion ने advance booking में 11 लाख से ज्यादा टिकट बेच दी हैं। फिल्म की extended weekend advance booking ₹37 करोड़ पार कर चुकी है।