ONSCREENBUZZ
BUZZ

Lust Stories 3 Review: चाहत का खेल शुरू हुआ, रिश्ते उलझे… और हर कहानी का स्वाद निकला अलग

चार कहानियां, चार अलग अंदाज और चाहत का एक ही रंग। Lust Stories 3 कहीं मजेदार है, कहीं उलझी हुई और कहीं उम्मीद से ज्यादा दिलचस्प। पढ़िए पूरा रिव्यू और जानिए हमारी 3 स्टार की वजह।

✍️ By Rajni
📅 Sep 18, 2026
Lust Stories 3 Review: चाहत का खेल शुरू हुआ, रिश्ते उलझे… और हर कहानी का स्वाद निकला अलग
Media Desk / OnscreenBuzz.com


अवधि: 2 घंटे 40 मिनट

प्लेटफॉर्म: Netflix

रेटिंग: ⭐⭐⭐/5

Lust Stories 3 नाम सुनते ही समझ आ जाता है कि इस बार मामला प्यार की सीधी-सादी कहानी का नहीं है। यहां चाहत है, आकर्षण है, रिश्तों की उलझन है और चार डायरेक्टर्स हैं, जो Lust को अपने-अपने अंदाज में समझाने की कोशिश करते हैं। अच्छी बात ये है कि फिल्म ज्यादातर वक्त बोल्ड होने के चक्कर में फूहड़ नहीं होती। लेकिन दिक्कत ये है कि चारों कहानियों का स्वाद बराबर नहीं है।

कहानी

फिल्म चार अलग-अलग कहानियों में बंटी है और हर कहानी Lust को एक अलग नजरिए से देखती है।

पहली कहानी में कनकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे दो करीबी दोस्त हैं, जो अपनी शादीशुदा जिंदगी से पूरी तरह खुश नहीं हैं। एक ट्रिप के दौरान दोनों कुछ ऐसा करने की सोचती हैं, जो उनकी दोस्ती और शादी दोनों की परीक्षा ले सकता है। अभिषेक बनर्जी और विजय वर्मा इसमें खूब मजा जोड़ते हैं। आइडिया मजेदार है, लेकिन कहानी जितनी दूर तक जा सकती थी, उतनी जाती नहीं।

दूसरी कहानी में गुरफतेह पीरजादा डबल रोल में हैं और सना थंपी की एंट्री के साथ मामला आकर्षण से निकलकर अपराध और ट्विस्ट तक पहुंच जाता है। शुरुआत पकड़ती है, लेकिन आगे कहानी थोड़ी जरूरत से ज्यादा उलझ जाती है।

तीसरी कहानी में राधिका मदान और अली फजल तलाक के कगार पर खड़े कपल हैं। दोनों के बीच प्यार लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन जब भी मिलते हैं तो पुरानी केमिस्ट्री फिर जाग जाती है। यहां Lust सिर्फ चाहत नहीं, बल्कि टूटते रिश्ते के बीच बचा हुआ एक आखिरी कनेक्शन बन जाती है। चारों में ये कहानी सबसे ज्यादा रिलेटेबल लगती है।

और फिर आती है विशाल भारद्वाज की कहानी, जो 1980 के दशक के हैदराबाद में सेट है। अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ पति-पत्नी बने हैं। अदिति का किरदार अपनी दबाई हुई इच्छाओं और इरॉटिक साहित्य की तरफ बढ़ते आकर्षण के जरिए खुद की एक नई दुनिया खोजता है। यही कहानी फिल्म में सबसे ज्यादा शरारत, ह्यूमर और अलग रंग लेकर आती है।

एक्टिंग

यहां सबसे बड़ा सरप्राइज अदिति राव हैदरी हैं। उनकी मासूमियत और शरारत का कॉम्बिनेशन कमाल है। सिद्धार्थ भी अपने किरदार में काफी सहज लगते हैं और दोनों की केमिस्ट्री कहानी को काफी ऊपर उठाती है।

राधिका मदान और अली फजल अपनी कहानी में गुस्सा, प्यार और टूटन तीनों को अच्छे से पकड़ते हैं। दोनों के बीच की बेचैनी स्क्रीन पर साफ महसूस होती है।

कनकणा, राधिका आप्टे, विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी भी अपने हिस्से का काम बढ़िया करते हैं। गुरफतेह का डबल रोल दिलचस्प है, लेकिन किरदारों से ज्यादा उनकी कहानी उलझी हुई लगती है।

डायरेक्शन और स्टोरीटेलिंग

चारों डायरेक्टर्स का अपना टच साफ दिखाई देता है। विक्रमादित्य मोटवाने का सेक्शन मजेदार आइडिया से शुरू होता है, लेकिन इमोशनल असर थोड़ा कम रह जाता है।

किरण राव की कहानी देखने में खूबसूरत है, लेकिन ट्विस्ट पर ज्यादा निर्भर हो जाती है।

शकुन बत्रा सबसे ज्यादा रिश्तों के अंदर घुसते हैं और Lust को एक भावनात्मक जरूरत की तरह दिखाते हैं। यही वजह है कि उनकी कहानी फिल्म की सबसे मजबूत कहानियों में आती है।

लेकिन सबसे अलग रंग विशाल भारद्वाज का है। उन्होंने बोल्ड विषय को ह्यूमर, पीरियड सेटिंग और शानदार किरदारों के साथ इस तरह पेश किया है कि कहानी न तो असहज लगती है और न ही बनावटी।

म्यूजिक और टेक्निकल पहलू

फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट इसकी कहानियों के मूड के साथ बदलता है। खासकर विशाल भारद्वाज वाला हिस्सा रंग, सेटिंग और सिनेमैटोग्राफी के मामले में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। म्यूजिक भी कहानी के मूड को बनाए रखने में मदद करता है और ‘घट पट’ खास तौर पर ध्यान खींचता है।

क्या कमी रह गई?

सबसे बड़ी समस्या यही है कि चारों कहानियां बराबर मजबूत नहीं हैं। पहली दो कहानियां अपने आइडिया से उम्मीद जगाती हैं, लेकिन उतना दम नहीं दिखा पातीं। तीसरी कहानी कहीं-कहीं रिश्तों को समझाने में थोड़ी ज्यादा देर लगा देती है।

और फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है इसका 2 घंटे 40 मिनट का रनटाइम। कुछ हिस्से थोड़े और टाइट होते तो असर ज्यादा तेज होता।

फाइनल वर्डिक्ट

Lust Stories 3 में Lust है, प्यार है, उलझे रिश्ते हैं और काफी शरारत भी। लेकिन हर कहानी उतनी ही मजेदार नहीं है। जहां शकुन बत्रा रिश्तों की गहराई पकड़ते हैं, वहीं विशाल भारद्वाज फिल्म को उसका सबसे चटपटा और याद रहने वाला रंग देते हैं।

अगर आपको बोल्ड लेकिन सलीकेदार कहानियां, रिश्तों की उलझन और थोड़ा मसालेदार मनोरंजन पसंद है, तो इसे एक मौका दिया जा सकता है।

रेटिंग: ⭐⭐⭐/5

कुल मिलाकर, Lust Stories 3 की थाली में चार स्वाद हैं—दो ठीक-ठाक, एक दमदार और आखिरी वाला सबसे ज्यादा याद रहने वाला।

A

Rajni

Official editorial team covering cinema box office, OTT streaming releases, Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.

🔥 Related Articles & Recommended Stories

More stories from Movies

View Section →
Daayra Movie Review: Prithviraj Brings the Fire, Kareena Gets the Law—So Why Does This Thriller Lose Its Way?
Movies 🇬🇧 English

Daayra Movie Review: Prithviraj Brings the Fire, Kareena Gets the Law—So Why Does This Thriller Lose Its Way?

Prithviraj Sukumaran brings intensity, Kareena Kapoor stays restrained, but Meghna Gulzar’s Daayra struggles to maintain its grip despite a compelling story about justice, encounters and accountability.

📅 Sep 18
‘वाइब’ देखने बैठे थे, लेकिन फिल्म ने ऐसा झटका दिया कि इंटरवल तक हंसी और अंत तक सिरदर्द—कुणाल खेमू की ये कैसी खिचड़ी है?
Movies 🇬🇧 English

‘वाइब’ देखने बैठे थे, लेकिन फिल्म ने ऐसा झटका दिया कि इंटरवल तक हंसी और अंत तक सिरदर्द—कुणाल खेमू की ये कैसी खिचड़ी है?

कुणाल खेमू की ‘वाइब’ शुरुआत में मजेदार लगती है, लेकिन कहानी आगे बढ़ते-बढ़ते इतनी चीजें जोड़ लेती है कि एंटरटेनमेंट पीछे छूट जाता है।

📅 Sep 18
Lust Stories 3 Review: Four Shades of Desire, Plenty of Spark, But Not Every Story Hits the Mark
Movies 🇬🇧 English

Lust Stories 3 Review: Four Shades of Desire, Plenty of Spark, But Not Every Story Hits the Mark

Four directors, four stories and plenty of complicated desire. Lust Stories 3 has its share of hits and misses, but Aditi Rao Hydari, Siddharth, Radhika Madan and Ali Fazal ensure there is enough spark to keep things interesting.

📅 Sep 18